Monday, September 12, 2011

दोस्ती के वादे भी कितने अजीब होते हैं.

रोना चाहूँ तब भी रो नहीं पाता हूँ रोमिल,
दोस्ती के वादे भी कितने अजीब होते हैं.

#रोमिल

Saturday, September 10, 2011

अजनबी से मिलते हैं!

रोमिल, सब ही अपनों से मिलते हैं
मज़ा तो तब आता हैं जब लोग अजनबी से मिलते हैं!

#रोमिल

Friday, September 9, 2011

तहज़ीब

तहज़ीब के शहर से आया हूँ, 
कुछ और नहीं बस तहज़ीब ही साथ लाया हूँ !

#रोमिल

Thursday, September 8, 2011

अपने रब की रहमत कहता हूँ!

दुनिया-ए-जहाँ, जो मेरी मुहब्बत को कहती है मेरा पागलपन
रोमिल, मैं उसे अपने रब की रहमत कहता हूँ!

#रोमिल

Wednesday, September 7, 2011

तमाशा बनकर, खुद्दार नहीं जिया करते!

जिम्मेदारियों ने मुझे क़ैद करके रखा हुआ हैं रोमिल
वरना तमाशा बनकर, खुद्दार नहीं जिया करते!

#रोमिल

Tuesday, September 6, 2011

आज भी खुशबू तेरे ख़त से आती हैं...

आज भी खुशबू तेरे ख़त से आती हैं
आज भी ख़त पढ़ लूँ तो आँखों से नींद छीन जाती हैं...
*
आज भी तेरे लिखे शब्दों पर गुमान होता हैं
आज भी हर पल तेरे नाम होता हैं...
*
आज भी शब्द तेरे नग़मे बनकर हवा में बिखर जाते हैं
आज भी शब्द तेरे फ़िज़ाओं में गाते हैं...
*
आज भी ज़िन्दगी रोशन हो जाती हैं रोमिल
आज भी खतों में छुपी तेरी मोहब्बत बड़ी याद आती हैं...


#रोमिल

Monday, September 5, 2011

मैं भी कितना पागल था...

मैं भी कितना पागल था
तितलियों के नाम रखा करता था...
***
जब फूल खिलते थे
मैं तुम्हारा अक्स ढूँढा करता था...
मैं भी कितना पागल था
तितलियों के नाम रखा करता था...
***
तपती धूप में
सर्द हवाओं में
बारिशों में
मैं तेरे पीछे-पीछे भागा करता था...
मैं भी कितना पागल था
तितलियों के नाम रखा करता था...
***
जब तुम नहीं आती थी
तेरी यादों में उलझा-उलझा रहता था
सुबह से शाम तक उदास इंतज़ार करता रहता था
मैं भी कितना पागल था
तितलियों के नाम रखा करता था...
***
मैं भूल गया था
तितलियों के तो पंख भी होते हैं
खुशबू की चाहत में वो दूर उड़ जाती हैं
फिर कभी लौट कर नहीं आ पाती...
फासले बढ़ जाते हैं...
मैं भी कितना पागल था
तितलियों के नाम रखा करता था...
***
रोमिल मैं भी कितना पागल था...

#रोमिल