Friday, October 7, 2011

सुबह यादों में बीत जाती हैं

सुबह यादों में बीत जाती हैं
रात इंतज़ार में बीत जाती हैं...
***
काफिले-काफिले बदलते रहते हैं 
ज़िन्दगी सफ़र में बीत जाती हैं...
***
वोह वादा करके मिलाने न आये तो 
फ़िक्र उसकी मुझे खा जाती हैं...
***
कैसे भूल जायुं उसकी मुस्कान रोमिल
वोह ही तो सांसें चलाना सीखती हैं...

Thursday, October 6, 2011

समझ

जब समझ नहीं थी सनम को हमारी शायरी के अल्फाज़ो की,
तब खूब तालियाँ बजाया करते थे,
जब से समझने लगे है हमारी शायरी के अल्फाज़ो को रोमिल,
तब से आंसू बहाया करते हैं...

#रोमिल

Wednesday, October 5, 2011

ख़ाक-ए-इज्ज़त

महफ़िल में जाकर अपनी बेइज्जती करवाए कौन
अपने काफी है ख़ाक-ए-इज्ज़त मिलाने को.

#रोमिल

Tuesday, October 4, 2011

कभी तुमको ना मैं सताऊंगा

कभी तुमको ना मैं सताऊंगा
मोहब्बत-ए-दर्द तुमको ना बताऊंगा,
वादा है मेरा, दूर इतना मैं चला जाऊँगा,
चाहे जितना भी तुम पुकारो,
वापस नहीं आऊँगा!

#रोमिल

Monday, October 3, 2011

लगता हैं मोहब्बत करती हो...

गुमसुम चुपचाप रहती हो
उलझी-उलझी ख्यालों में खोई रहती हो
किसका इंतज़ार करती रहती हो
लगता हैं मोहब्बत करती हो...
~*~
हर एक दुनिया वाला यह सवाल करता हैं
किसके लिए तू माँग भरती हो
किसके लिए सजती-सवरती हो
लगता हैं मोहब्बत करती हो...
~*~
दुआ किसके लिए मांगती हो
खुदा से किसके लिए लड़ाई करती हो
कौन हैं वोह जो आँखें नर्म कर जाता हैं
लगता हैं मोहब्बत करती हो...
रोमिल, लगता हैं मोहब्बत करती हैं...

#रोमिल

Friday, September 30, 2011

खुदा शायद मुझसे नाराज़ सा है...

उससे बात नहीं होती तो ऐसा महसूस होता है रोमिल 
खुदा शायद मुझसे नाराज़ सा है...

#रोमिल

रोमिल बार-बार यह सोच कर डाकिए से मिलता हूँ
कहीं उसका पैगाम आया तो नहीं है...
यह सोचकर रात में घर के बाहर दिया जला देता हूँ
कहीं वो मेरे घर के बाहर से निकला तो नहीं है...

#रोमिल

Thursday, September 29, 2011

बस जिंदा रहने के पैमाने बदल जाते हैं.

वक़्त के साथ हमराज़ बदल जाते हैं
हर एहसास बदल जाते हैं
किसी के बिछड़ने से कोइए मर नहीं जाता
बस जिंदा रहने के पैमाने बदल जाते हैं.