Saturday, November 5, 2011

शुक्र

शुक्र खुदा का इतना हैं वो आये नज़र तो सही
रोमिल, मेरे साथ नहीं, किसी और के साथ ही सही!

#रोमिल

Wednesday, November 2, 2011

जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं

जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं
अपना दीवानापन याद आता हैं
उनका हुस्न याद आता हैं.
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
***
जलती हुई आग के सामने
जलते हुए दो बदन याद आते हैं...
कभी उनका नज़रें झुकाना याद हैं
कभी नज़रों से तीर चलाना याद आता हैं.
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं...
***
कहने को तो बहुत बातें थी
मगर लाबून का थर-थराना याद आता हैं
कभी उनका कुछ कहते-कहते रुक जाना याद आता हैं
कभी हमारा मिश्री की तरह बातें बोलना याद आता हैं...
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं...
***
हर लम्हा बहुत तड़फाता हैं
पल-पल याद दिलाता हैं
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
चहरे से जुल्फों को हटाना याद आता हैं
शर्म से पैरों को दामन में छुपाना याद आता हैं
मखमली हाथों में चूड़ियों का खन-खनाना याद आता हैं
वो उँगलियों से ज़मीन पर हरकतें करना याद आता हैं...
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं
अपना दीवानापन याद आता हैं
उनका हुस्न याद आता हैं.
रोमिल, जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं...

#रोमिल

Tuesday, November 1, 2011

एक टूटा हुआ पत्ता उड़कर मेरे पास आया

एक टूटा हुआ पत्ता उड़कर मेरे पास आया
मुझसे पूछा
किसकी खता से मेरा यह हाल हुआ हैं
हवा का कसूर हैं या
खिज़ा का...

अभी तो डाल पर ठीक से नहीं झूल सका
अभी तो कई पंछियों की आवाज़े मुझे सुननी बाकी थी
अभी तो मैंने नहीं देखे कई बसंत
किसकी खता से मेरा यह हाल हुआ हैं
हवा का कसूर हैं या
खिज़ा का...

मैं बोला 
नहीं पता मुझे किसका कसूर हैं
हवा का, खिज़ा का या
खुदा का
बस इतना जानता हूँ कि
कसूर किसी का तो हैं...

#रोमिल

Monday, October 31, 2011

कितने

कितने हादसों की नुमाइश नहीं होती अखबारों में रोमिल,
कितने दिल टूट जाते है, बिना आंसू बहाए...

#रोमिल

Sunday, October 30, 2011

ज़िन्दगी ख़्वाब हो गई...

जाने क्या ख़ता हो गई
ज़िन्दगी जुदा हो गई
टूटे कुछ इस तरह से अपने ख़्वाब रोमिल
ज़िन्दगी ख़्वाब हो गई...

#रोमिल

Tuesday, October 18, 2011

मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

अगर हर चेहरे में उसका चेहरा नज़र आता हैं,
अगर हर बात पर उसका नाम लेता हूँ,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

अगर किसी के इंतज़ार करने में समय नहीं देखते,
अगर उसके आने पर दिल झूम उठता हैं,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...


अगर किसी के दूर जाने के बाद उसकी याद सताती हैं,

अगर सबके साथ रहते हुए भी अकेलापन महसूस करतें हैं,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

खुद से बातें करना,
हर प्यारे से गाने पर सिर्फ हम-दोनों का नज़र आना,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

उसके दिल में मेरे प्यार की कोई जगह नहीं,
फिर भी उसके हाँ का इंतज़ार करना,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ रोमिल,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

#रोमिल

Monday, October 17, 2011

मैं रोज़ नए गम से मिलता हूँ...

मैं रोज़ नए गम से मिलता हूँ,
जब तक गम-ए-शमा नहीं होती, 
तब तक मैं रोशन नहीं होता हूँ.
~
मैं तो बस तनहाइयों में उस चाँद को देखा करता हूँ,
फिर न जाने क्यों, खुद पर मुस्कुराकर रोता हूँ.
~
एक आइना थी तेरे आँखें रोमिल, 
जिसमे मैं, अपना दीदार हमेशा करता था,
जबसे आइना बेवफा हो गया,
तब से हमेशा नाक़ाब में रहता हूँ.

#रोमिल