Monday, August 15, 2011

लोग मीलों जाकर भी नहीं भूलते हैं अपनों को

लोग मीलों जाकर भी नहीं भूलते हैं अपनों को
उसकी तरह क्या बिछड़ता हैं कोई?
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ख़फा रहे वो मुझसे कोई गिला नहीं
कभी-कभी नज़रे तो मिला सकती हैं...
उसकी तरह क्या नज़रे फेर लेता हैं कोई?
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हवा भी दरवाज़ा धकेल कर घर में घुस आती हैं
कभी तुम भी हवा की तरह घर में आ जाया करो
क्या इतना भी हक अपनों पर रखता नहीं कोई?
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सुबह होते ही चिड़िया आकर बैठ गई मेरे घर की मुंडेरी पर
मैं दूर सड़क तक तुम्हारा रास्ता देखता रहा
फिर रब से बोला क्या अपने घर का रास्ता भूल जाता हैं कोई?
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एक परेशानी रहती हैं
उलझा रहता हूँ इस बात में
आखिर क्या वजह थी जुदाई की
"उसने कहाँ था...
दौलत और जिस्म दो ही चीज़ हैं इस दुनिया में"
आओ फिर से सोच कर देखे
शायद इससे बेहतर वजह हो कोई?
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लोग मीलों जाकर भी नहीं भूलते हैं अपनों को रोमिल
उसकी तरह क्या बिछड़ता हैं कोई?

#रोमिल

Saturday, August 13, 2011

ओस की बूंदों की तरह गिरते रहे आंसू मेरे

ओस की बूंदों की तरह गिरते रहे आंसू मेरे सुबह तक रोमिल...
मैं कुछ इस अंदाज़ में रोता रहा
उसको मौसम बहुत शबनमी लगा
वो चादर में लिपटकर सोता रहा...

#रोमिल

Friday, August 12, 2011

रात भर नींद नहीं आती है

रात भर नींद नहीं आती है
जैसे आँखों पर उजाला रखा है!
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वो मुझे देखकर भी दो क़दम नहीं चला यारों
जैसे पैरों में ज़ंजीर बांध रखा है!
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किससे कहूँ उनकी शिकायत मेरे दोस्तों
हर किसी को तो उन्होंने अपना हमदम बना रखा है!
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खुदा से बस इतनी सी दुआ मंगाते है हम रोमिल 
वो मेरा दिल रिहा कर दे
जो उन्होंने अपने पहलू में छुपा रखा है!

#रोमिल

Thursday, August 11, 2011

पेड़ से टूट कर टहनी की ज़िन्दगी क्या है?

अपनों से बिछड़कर,
यही सोचता हूँ मैं रोमिल,
कि पेड़ से टूट कर टहनी की ज़िन्दगी क्या है?

#रोमिल

लोग कहते हैं मैं देवदास बना फिरता हूँ!


होंठों पर हंसी
दिल में गम लिए फिरता हूँ
लोग कहते हैं मैं देवदास बना फिरता हूँ!
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पारो (दोस्त) को
हर चंद्रमुखी में ढूँढता फिरता हूँ
लोग कहते हैं मैं देवदास बना फिरता हूँ!
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बचपन की यादें
पारो (दोस्त) की बातें याद किया करता हूँ
लोग कहते हैं मैं देवदास बना फिरता हूँ!
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हूँ नाशे में,
मुझे होश नहीं
मैं यादों का हर पल जाम पिया करता हूँ
रोमिल, लोग कहते हैं मैं देवदास बना फिरता हूँ!

#रोमिल

Wednesday, August 10, 2011

मेरी प्यारी बहन

मेरी प्यारी बहन,
आज तुझे वही बचपन का प्यार दूँ,
अपनी बाहों का तुझे हार दूँ,
वही खट्टी-मीठी तकरार दूँ,
वही स्नेह, वही दुलार दूँ,
मेरी प्यारी गुडिया सी बहन,
तुझे खुशियों का आशीर्वाद दूँ...

तेरी हर छोटी से छोटी जिद्द पूरी कर दूँ,
अपने कंधे पर बैठा कर झुला, झूला दूँ,
तेरी नज़रे उतारू,
तेरी मुस्कान पर अपनी ज़िन्दगी वार दूँ,
मेरी प्यारी गुडिया सी बहन,
तुझे खुशियों का आशीर्वाद दूँ...

#रोमिल

Tuesday, August 9, 2011

बिस्तर पर सन्नाटा सा ठहरा रहता है

बिस्तर पर सन्नाटा सा ठहरा रहता है
कमरा भी रात भर सुना-सुना सा रहता है
रोमिल, रात न जाने कहाँ छुप सी गई है
अब तो आँखों में हर पल सवेरा सा रहता है...

#रोमिल