Tuesday, September 20, 2011

मेरे आँसू को थोडा थम जाने दो!

अभी बहुत बरसात हो रही है तुम कहाँ जाओगी,
भीग जाओगी,
मेरे आँसू को थोडा थम जाने दो!

#रोमिल

Monday, September 19, 2011

roz hum khud se takrar karte hai

roz hum khud se takrar karte hai
kyun hum us bewafa se itna pyar karte hai

Itne zakhm diye tune aye khuda
aakar hum tere dar par kyon ibadat baar-baar karte hai

mujhe maloom hai iska anjaam kya hoga
lootne ke liye hum fir mohabbat ka aagaz karte hai

na mujhe dekh apnepan ki nazaron se
jo apne hote hai wahi qatal-e-aam karte hai

aur 

yeh keh kar maine usse tauba kar li romil
kya daulat wale kabhi garibon se pyar karte hai...

#Romil

रोज हम खुद से तकरार करते हैं 
क्यों हम उस बेवफा से इतना प्यार करते हैं... 

इतने जख्म दिए तूने ए खुदा 
आकर हम तेरे दर पर क्यों इबादत बार-बार करते हैं... 

मुझे मालूम है इसका अंजाम क्या होगा 
लूटने के लिए हम फिर मोहब्बत का आगाज़ करते हैं... 

ना मुझे देख अकेलेपन की नजरों से 
जो अपने होते हैं वहीं क़त्ल-ए-आम करते हैं 

और 

यह कहकर मैंने उससे तौबा कर ली रोमिल 
क्या दौलत वाले कभी गरीबों से प्यार करते हैं... 

#रोमिल

kash kuch pal uska mehmaan hota...

kash kuch pal uska mehmaan hota
main bhi apni qismat ka qadardaan hota

woh apna naqab hata kar mujhse milti
main bhi nazaron ka thoda beimaan hota

simta leta usko apni baahon mein
neeche zameen aur upper neela aasmaan hota

reh-reh kar baarish ki boondein gir rahi hoti
khuda bhi apna milan dekh kar khush hota

ajeeb tarah se un khoobsurat palon ka basar hota romil
har saans mein sirf uska naam hota...

kash kuch pal uska mehmaan hota...

#Romil

काश कुछ पल उसका मेहमान होता
मैं भी अपनी किस्मत का कद्रदान होता

वो अपना नक़ाब हटाकर मुझसे मिलती
मैं भी नज़रों का थोडा बेईमान होता

सिमटा लेता उसको अपनी बाहों में
नीचे ज़मीन और ऊपर नीला आसमान होता

रह-रह कर बारिश की बूँदें गिर रही होती
खुदा भी अपना निगहेबान होता

अजीब तरह से उन खूबसूरत पलों का बसर होता रोमिल
हर सांस में सिर्फ उसका ही नाम होता...

काश कुछ पल उसका मेहमान होता...

#रोमिल

Sunday, September 18, 2011

अपने आपसे शिकायतें कैसी?

जिम्मेदारियां हो, चाहे मजबूरियां
कुछ भी हो रोमिल
जिंदा तो रहना ही हैं तुझे
फिर अपने आपसे शिकायतें कैसी?

#रोमिल

सलीका

जुदा होने का सलीका भी नहीं सीखा उसने रोमिल
जाते - जाते खुदा हाफ़िज़ तो कह जाता !

#रोमिल

Saturday, September 17, 2011

वो हंस - हंस के खुद को सजा देता है....

वो हंस - हंस के खुद को सजा देता है
गम खुद के लिए रख लेता है
खुशियाँ अंजानो में बांट देता है...

उस जैसा शख्स कहाँ मिलेगा
जो हीरा है
फिर भी नकाबों में छुपा रहता है...

आने वाले हर मोड़ को छोड़ देता है
वो कामयाबी की मंजिल से दूर ही रहता है
इतना बेकरार है मिलने के लिए उससे
वो रास्ते दर रास्ते भटकता रहता है...

अजीब लगती है उसकी कहानी रोमिल
वो अनदेखों से प्यार किया करता है 
वो मरे हुए लोगों से बातें किया करता है....

वो हंस - हंस के खुद को सजा देता है...

#रोमिल 

Friday, September 16, 2011

खौफ के मारे

खौफ के मारे शाम से खिड़कियाँ, दरवाजों को बंद कर लेता हूँ मैं रोमिल
कहीं चाँद फिर ना जला दे मुझको!

#रोमिल