Friday, June 17, 2011

Main Kutta Hoon..Tum Kutiya Ho..Tum Aayi Toh,Sach Kehta Hoon…Ke Aaya Mausam, Bhonkne Ka

“Main Kutta Hoon… 
Tum Kutiya Ho… 
Tum Aayi Toh, Sach Kehta Hoon… 
Ke Aaya Mausam, Bhonkne Ka…” 

(I am a dog, 
you’re a bitch… 
since you’ve come; I can say honestly that it seems like the weather to bark).

MOVIE - READY (2011)

यह बूँदें

यह बूँदें
यह महकता हुआ मौसम
और भी सुन्दर होते
गर तुम मेरे साथ होते...
*
होती प्यार की बातें
भीगे गेसू से सजी होती रातें
गर तुम मेरे साथ होते...
*
होता उडाता हवा में आँचल
बादलों संग बहता अपना मन
गर तुम मेरे साथ होते...
*
और भी हसीं लगता यह दिन
पल पल मुस्कुराता यह दिन
गर तुम मेरे साथ होते... 
गर तुम मेरे साथ होते...

#रोमिल

Thursday, June 16, 2011

इन दिनों

हूकू से मिलाने की लगन लगी हैं इन दिनों 
अजीब सी हसरत हुई हैं इन दिनों...
***
तू भी नज़र नहीं आती आजकल दोस्त
लगता है बादलों ने छुपा रखा हैं तुझे इन दिनों...
***
इंतज़ार की नींद में खोया रहता हूँ
रात जागते-जागते कटती हैं इन दिनों...
***
कैसे हो अपना मिलन हूकू
रब बना हैं दुश्मन अपना इन दिनों...
***
न जाने कैसी होगी हूकू
खबर भी नहीं देता कोइए उसकी इन दिनों...
***
अब किसी से लड़ने-झगड़ने का मन नहीं करता रोमिल 
खुद में ही उलझा रहता हूँ इन दिनों...

#रोमिल

Wednesday, June 15, 2011

सुबह यादों में बीत जाती हैं

सुबह यादों में बीत जाती हैं
रात इंतज़ार में बीत जाती हैं...
***
काफिले-काफिले बदलते रहते हैं 
ज़िन्दगी सफ़र में बीत जाती हैं...
***
वो वादा करके मिलने न आये तो
फ़िक्र उसकी मुझे खा जाती हैं...
***
कैसे भूल जाऊँ उसकी मुस्कान रोमिल 
वो ही तो सांसें चलना सिखाती हैं...

#रोमिल

Tuesday, June 14, 2011

कुछ लोग हमारे साथ वफ़ा से रहे

कुछ लोग हमारे साथ वफ़ा से रहे
फिर भी बेवफा से रहे 
~
चिराग ने जलाया हैं घर मेरा 
फिर क्यों दुश्मनी हवा से रहे 
~
खुद ही मोहब्बत का रोग हमने पाला हैं
फिर क्यों गिला महबूब से रहे 
~
हजारों ज़ुल्मो-सितम दिए हैं मुझे खुदा ने
फिर क्यों खफा दुआ से रहे !
~
ज़िन्दगी ने पल-पल पर मेरा साथ छोड़ा हैं रोमिल
फिर क्यों उम्मीद मौत से रहे!

#रोमिल

Monday, June 13, 2011

यह रिश्ते...

यह रिश्ते...


इंसान की जगह पत्थर है यह रिश्ते,
हैं अपने फिर भी कितने मतलबी है यह रिश्ते...

दौलत की मंदी में बिक जाते है यह रिश्ते,
बनकर अपने, धोखा दे जाते है यह रिश्ते...

सिर्फ किताबो में फूल बन कर रह जाते है यह रिश्ते,
वक़्त आने पर साथ छोड़ जाते है यह रिश्ते...

यादों में तन्हाई बनकर याद आते है यह रिश्ते,
बनाकर अपना, दगा दे जाते है यह रिश्ते...

ना इनको समझाना कभी अपना तुम रोमिल,
मौसम की तरह बदल जाते है यह रिश्ते...

Saturday, June 11, 2011

छुप -छुपकर दीवारों संग रोना पड़ता हैं

छुप -छुपकर दीवारों संग रोना पड़ता हैं
हर ख़्वाब को मिटाकर सोना पड़ता हैं 
कोई नहीं होता गम में अपने साथ 
बस रब से गिला करना पड़ता हैं...
***
चेहरे को झूठी हंसी के साथ सजाना पड़ता हैं
रास्तों को अपना घर बनाना पड़ता हैं 
किस लिए तुम्हें माफ़ कर दूं रोमिल
वफा का इल्जाम तो उम्र भर सहना पड़ता हैं...

#रोमिल