Saturday, December 3, 2011

गर तुम मेरे साथ होते

यह बूँदें
यह महकता हुआ मौसम
और भी सुन्दर होते
ग़र तुम मेरे साथ होते
*
होती प्यार की बातें
भीगी गेसू से सजी होती रातें 
ग़र तुम मेरे साथ होते
*
होता उड़ता हवा में आँचल
बादलों संग बहता अपना मन
ग़र तुम मेरे साथ होते
*
और भी हसीन लगता यह दिन
पल-पल मुस्कुराता यह दिन
ग़र तुम मेरे साथ होते...
रोमिल ग़र तुम मेरे साथ होते...

#रोमिल

Friday, December 2, 2011

मोहब्बत हो जाएगी नजदीकियां न बढ़ाया कीजिये..

रोमिल, चिंगारियों को न इस कदर हवा दीजिये 
मोहब्बत हो जाएगी नजदीकियां न बढ़ाया कीजिये..
*
हूँ मैं आग..आग
मुझे सिर्फ हवा का झोंका न समझिये...
*
जल चुकी हैं मुझसे कई हसीनाएं
वक़्त से पहले अपने क़दम थाम लीजिये...
*
खुदा की क़सम
अब यह प्यार न होगा हमसे हुस्न वालों
इतना तो हमारा ऐतबार कीजिये...

#रोमिल

Thursday, December 1, 2011

खुदा का दर छोड़कर तेरे पास आये है...

बहुत मजबूर होकर तेरे पास आये है
खुदा क़सम
खुदा का दर छोड़कर तेरे पास आये है...
*
न ठुकराना हम दर्द-ए-दिल वालों को
अपनों से ठोकर खाकर तेरे पास आये है...
*
न तौफा न दौलत
न तौफा न दौलत
उसकी बेवफाई की कहानी साथ लाये है...
*
तुमसे क्या झूठ बोले
उम्र थोड़ी बची है
तुमसे क्या झूठ बोले
उम्र थोड़ी बची है
अपने कफ़न का सामान साथ लाये है...
*
बहुत मजबूर होकर तेरे पास आये है
खुदा क़सम रोमिल
खुदा का दर छोड़कर तेरे पास आये है...

#रोमिल

Wednesday, November 30, 2011

जैसे फूल, काँटों से लिपटे-लिपटे रहते है...

वोह जिद पर अड़े-अड़े रहते है
जैसे फूल, काँटों से लिपटे-लिपटे रहते है...
*
अनबन में हम-दोनों इस तरह उलझे है
वो दूर भी रहते हैं, करीब भी रहते है...
*
हर एक बात पर जो मेरा ज़िक्र किया करते थे
वो आजकल मेरा नाम लेने से भी परहेज किया करते है...
*
उलझन है बस इस बात की दिल में रोमिल
वो देकर दर्द मुझे
क्यों इतना तन्हाई में रोते है...

#रोमिल

Tuesday, November 29, 2011

सजदा

रोमिल कुछ इस तरह तुमको याद मैं कर लेता हूँ
तेरा नाम लिखकर सजदा मैं कर लेता हूँ...

#रोमिल

Thursday, November 24, 2011

क्या करूं...

यह साल भी बीता बिना बरसात के
मैं आंसू न बहाऊ तो क्या करूं...
*!*
इंतज़ार में कटती नहीं रातें
मैं शमा न जलाऊ तो क्या 
करूं...
*!*
उनसे जब पूछे बेवफाई की वजह हैं क्या
वो तब भी कुछ न बताये तो क्या 
करूं...
*!*
यूंह तो तेरी महफ़िल में मिलते हैं सब गले
कोई दिल से नहीं मिलता तो क्या 
करूं...
*!*
कोई नहीं हैं अपना इस शहर में
तेरा शहर न छोड़ जाऊं तो क्या 
करूं...

#रोमिल

Wednesday, November 23, 2011

इकरार – ए – मोहब्बत

"इकरार – ए – मोहब्बत करके तो देख रोमिल,
ज़िन्दगी का रुख ही बदल जायेगा,
जो तुझे आज लगता है ज़माने से डर,
कल देखना ज़माना खुद तुझसे डर जायेगा”

#रोमिल

Saturday, November 19, 2011

दर्द इतना बढ़ गया है कि अब क्या सुनाये

दर्द इतना बढ़ गया है कि अब क्या सुनाये,
आँखें हो गई है पत्थर, कितना इंतज़ार और हम कर पाए,
मर जाने दो, बस खुली रहेंगे आँखें हमारी,
तुम्हारे इंतज़ार में बोलो इससे ज्यादा और क्या कर जाये!
बोलो! बोलो ! बोलो रोमिल !

Thursday, November 17, 2011

क़ाश

रोमिल, क़ाश रब करे ऐसा हो जाये,
तू मेरी कब्र बन जाये और मैं तुझमे समां जाऊं!

#रोमिल

Tuesday, November 15, 2011

मरने से पहले

अब कुछ भी लिखने को मन नहीं करता,
फिर भी कलम में स्याही डालता रहता हूँ,
शायद मैं मरने से पहले कुछ कहना चाहता हूँ...

सभी खवाब मेरे बिखर चुके है,
फिर भी रोज़ खवाबो की माला मैं बुनता रहता हूँ,
शायद मैं मरने से पहले खवाबो को सच होता देखना चाहता हूँ....

अगर रब मिलेगा कभी,
तो उससे पूछूँगा सवाल बहुत सारे,
पर लोग कहते है मरने से पहले वो किसी से मिलता नहीं है,
फिर भी रोज़ मैं उससे मिलाने की खवाइश दिल में बुनता रहता हूँ,
शायद मैं मरने से पहले रब से कुछ बातें पूछना चाहता हूँ....

मैं मरने से पहले रोमिल दिल को एक बार खुश देखना चाहता हूँ!

#रोमिल

Monday, November 14, 2011

एहसान

"रोमिल, जाते-जाते इस दुनिया से एक एहसान मेरे लिए कर जाना
अपनी कब्र को नाम मेरे कर जाना"

#रोमिल

Sunday, November 13, 2011

मैं हाथ की लकीरों का मोहताज नहीं...

मेरे हौसलों में वो उड़ान हैं मैं अपनी किस्मत बदल लूँगा रोमिल,
मैं हाथ की लकीरों का मोहताज नहीं...

#रोमिल

Saturday, November 12, 2011

फिर फूल झड़ने लगे...

रोमिल, उनकी बातों से फूल झड़ते थे
दिल की आरज़ू हैं कि फिर फूल झड़ने लगे...

#रोमिल

Friday, November 11, 2011

तुम भी वीरान हो गए हो !

रोमिल, अगर मेरा भी दिल-ए-आशियाना उजड़ा है
आँखें यह भी कहती है कि तुम भी वीरान हो गए हो !

#रोमिल

Thursday, November 10, 2011

बिखर कर दूसरे की ज़िन्दगी में खुशबू लाते है...

"रोमिल, कांटे हमेशा डाली के साथ लिपटे रहते है...
मगर फूल हमेशा बिखर जाते है और बिखर कर दूसरे की ज़िन्दगी में खुशबू लाते है..."

#रोमिल

Wednesday, November 9, 2011

मैं खुश हूँ उसे खुश देखकर...

रोमिल, अपने दिल-ए-अरमान को सर-ए-दुनिया में बेचकर
मैं खुश हूँ उसे खुश देखकर...

#रोमिल

Tuesday, November 8, 2011

सुकून

ग़र मंदिर में सुकून मिलता
ग़र मस्जिद में सुकून मिलता
तो रोमिल, इंसान घर क्यों जाता?

#रोमिल

Monday, November 7, 2011

आदत

उसे जो झूठ बोलने की आदत पड़ गई हैं रोमिल,
कसूर मेरा था जो उसकी हर बात पर ऐतबार कर लेता था.

#रोमिल

Sunday, November 6, 2011

सच्चाई का मैं आइना था...

पत्थर का छोटा सा टुकड़ा भी मुझे तोड़ जाता था रोमिल
सच्चाई का मैं आइना था...

#रोमिल

Saturday, November 5, 2011

शुक्र

शुक्र खुदा का इतना हैं वो आये नज़र तो सही
रोमिल, मेरे साथ नहीं, किसी और के साथ ही सही!

#रोमिल

Wednesday, November 2, 2011

जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं

जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं
अपना दीवानापन याद आता हैं
उनका हुस्न याद आता हैं.
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
***
जलती हुई आग के सामने
जलते हुए दो बदन याद आते हैं...
कभी उनका नज़रें झुकाना याद हैं
कभी नज़रों से तीर चलाना याद आता हैं.
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं...
***
कहने को तो बहुत बातें थी
मगर लाबून का थर-थराना याद आता हैं
कभी उनका कुछ कहते-कहते रुक जाना याद आता हैं
कभी हमारा मिश्री की तरह बातें बोलना याद आता हैं...
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं...
***
हर लम्हा बहुत तड़फाता हैं
पल-पल याद दिलाता हैं
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
चहरे से जुल्फों को हटाना याद आता हैं
शर्म से पैरों को दामन में छुपाना याद आता हैं
मखमली हाथों में चूड़ियों का खन-खनाना याद आता हैं
वो उँगलियों से ज़मीन पर हरकतें करना याद आता हैं...
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं
अपना दीवानापन याद आता हैं
उनका हुस्न याद आता हैं.
रोमिल, जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं...

#रोमिल

Tuesday, November 1, 2011

एक टूटा हुआ पत्ता उड़कर मेरे पास आया

एक टूटा हुआ पत्ता उड़कर मेरे पास आया
मुझसे पूछा
किसकी खता से मेरा यह हाल हुआ हैं
हवा का कसूर हैं या
खिज़ा का...

अभी तो डाल पर ठीक से नहीं झूल सका
अभी तो कई पंछियों की आवाज़े मुझे सुननी बाकी थी
अभी तो मैंने नहीं देखे कई बसंत
किसकी खता से मेरा यह हाल हुआ हैं
हवा का कसूर हैं या
खिज़ा का...

मैं बोला 
नहीं पता मुझे किसका कसूर हैं
हवा का, खिज़ा का या
खुदा का
बस इतना जानता हूँ कि
कसूर किसी का तो हैं...

#रोमिल

Monday, October 31, 2011

कितने

कितने हादसों की नुमाइश नहीं होती अखबारों में रोमिल,
कितने दिल टूट जाते है, बिना आंसू बहाए...

#रोमिल

Sunday, October 30, 2011

ज़िन्दगी ख़्वाब हो गई...

जाने क्या ख़ता हो गई
ज़िन्दगी जुदा हो गई
टूटे कुछ इस तरह से अपने ख़्वाब रोमिल
ज़िन्दगी ख़्वाब हो गई...

#रोमिल

Tuesday, October 18, 2011

मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

अगर हर चेहरे में उसका चेहरा नज़र आता हैं,
अगर हर बात पर उसका नाम लेता हूँ,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

अगर किसी के इंतज़ार करने में समय नहीं देखते,
अगर उसके आने पर दिल झूम उठता हैं,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...


अगर किसी के दूर जाने के बाद उसकी याद सताती हैं,

अगर सबके साथ रहते हुए भी अकेलापन महसूस करतें हैं,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

खुद से बातें करना,
हर प्यारे से गाने पर सिर्फ हम-दोनों का नज़र आना,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

उसके दिल में मेरे प्यार की कोई जगह नहीं,
फिर भी उसके हाँ का इंतज़ार करना,
अगर इसे प्यार कहते हैं, तोह हाँ रोमिल,
मैंने भी किसी से प्यार किया हैं...

#रोमिल

Monday, October 17, 2011

मैं रोज़ नए गम से मिलता हूँ...

मैं रोज़ नए गम से मिलता हूँ,
जब तक गम-ए-शमा नहीं होती, 
तब तक मैं रोशन नहीं होता हूँ.
~
मैं तो बस तनहाइयों में उस चाँद को देखा करता हूँ,
फिर न जाने क्यों, खुद पर मुस्कुराकर रोता हूँ.
~
एक आइना थी तेरे आँखें रोमिल, 
जिसमे मैं, अपना दीदार हमेशा करता था,
जबसे आइना बेवफा हो गया,
तब से हमेशा नाक़ाब में रहता हूँ.

#रोमिल

Friday, October 14, 2011

बस कुछ और

बस कुछ और दिन तुम अपना दिल बहलालो,
फिर जाने कब बात हो.
बस कुछ और पल तुम मुस्कुरालो,
फिर जाने कब ख़ुशी साथ हो.
बस कुछ और राह हाथों में हाथ डाल कर चलो,
फिर जाने कब साथ राह हो.

#रोमिल अरोरा

Thursday, October 13, 2011

कितनी हसरत थी

कितनी हसरत थी
तुमको अपना बनाने की
ख़्वाब सजाने की
तेरे संग दुनिया बसाने की ...
~*~
आँचल में तेरे छुप जाये आसमान
चाँद भी तेरा दीदार करे
कितनी हसरत थी
तुझको सजाने की...
~*~
तुझसे ही तो मेरे घर की पहचान होगी
तू ही तो मेरी आरज़ू, मेरे अरमान होगी
कितनी हसरत थी
तुझको अपना साया बनाने की...
~*~
दुनिया देखेगी, मोहब्बत अपनी
बंदगी अपनी, चाहत अपनी
कितनी हसरत थी
तुझको अपना रब बनाने की...
~*~
कितनी हसरत थी रोमिल
तुमको अपना बनाने की
ख़्वाब सजाने की
तेरे संग दुनिया बसाने की ...
[प्रेरित]

#रोमिल

Wednesday, October 12, 2011

साहिल के किनारे एक शख्स

साहिल के किनारे एक शख्स
खोया-खोया सा तुमको मिला होगा...

जब मोहब्बत का ज़िक्र उसके सामने छिड़ा होगा
तो सागर में भी एक तूफ़ान उठा होगा...
लिखकर ख़त सागर में डाल रहा होगा
रेत पर किसी का नाम लिख रहा होगा...

साहिल के किनारे एक शख्स 
खोया-खोया सा तुमको मिला होगा..
***
जब नज़रों की तरफ उसके देखोगे
तो सदियों का इंतज़ार जैसे छिपा होगा
सब तो चले जाते होंगे साहिल को तन्हा छोड़कर
वो ज़मीन पर चाँद के उतरने का इंतज़ार करता होगा...
साहिल के किनारे एक शख्स
खोया-खोया सा तुमको मिला होगा रोमिल...

#रोमिल

Tuesday, October 11, 2011

हाथ उठाकर यह दुआ किया करो

हाथ उठाकर यह दुआ किया करो रोमिल
न कोई जुदा हो
न 
कोई उदासियों में जीये
न 
कोई किसी के लिए तड़पे
न 
कोई परेशां हो...

#रोमिल

Monday, October 10, 2011

कोइए गम नहीं

मैं जला तो कोइए गम नहीं रोमिल...
कम से कम औरों को तो रोशनी मिल गई...

Sunday, October 9, 2011

हमारी जान है वो...

मोहब्बत में नादान है वो,
फिर भी हमारी जान है वो,
पल भर में आँखों से आंसू बहा देती है वो,
हर बात को दिल से लगा लेती है वो,
हमेशा रब, रूह की बातें करती है वो,
भोली है, 

मासूम है, 
दुनिया से अंजान है वो,
तभी तो रोमिल हमारी जान है वो!


#रोमिल

Saturday, October 8, 2011

कुछ नहीं रहता इज्ज़त, स्वाभिमान चले जाने के बाद...

ना दो किसी को अपनी ज़िन्दगी के साथ खेलने का हक़ रोमिल
कि कुछ नहीं रहता इज्ज़त, स्वाभिमान चले जाने के बाद...

#रोमिल

Friday, October 7, 2011

सुबह यादों में बीत जाती हैं

सुबह यादों में बीत जाती हैं
रात इंतज़ार में बीत जाती हैं...
***
काफिले-काफिले बदलते रहते हैं 
ज़िन्दगी सफ़र में बीत जाती हैं...
***
वोह वादा करके मिलाने न आये तो 
फ़िक्र उसकी मुझे खा जाती हैं...
***
कैसे भूल जायुं उसकी मुस्कान रोमिल
वोह ही तो सांसें चलाना सीखती हैं...

Thursday, October 6, 2011

समझ

जब समझ नहीं थी सनम को हमारी शायरी के अल्फाज़ो की,
तब खूब तालियाँ बजाया करते थे,
जब से समझने लगे है हमारी शायरी के अल्फाज़ो को रोमिल,
तब से आंसू बहाया करते हैं...

#रोमिल

Wednesday, October 5, 2011

ख़ाक-ए-इज्ज़त

महफ़िल में जाकर अपनी बेइज्जती करवाए कौन
अपने काफी है ख़ाक-ए-इज्ज़त मिलाने को.

#रोमिल

Tuesday, October 4, 2011

कभी तुमको ना मैं सताऊंगा

कभी तुमको ना मैं सताऊंगा
मोहब्बत-ए-दर्द तुमको ना बताऊंगा,
वादा है मेरा, दूर इतना मैं चला जाऊँगा,
चाहे जितना भी तुम पुकारो,
वापस नहीं आऊँगा!

#रोमिल

Monday, October 3, 2011

लगता हैं मोहब्बत करती हो...

गुमसुम चुपचाप रहती हो
उलझी-उलझी ख्यालों में खोई रहती हो
किसका इंतज़ार करती रहती हो
लगता हैं मोहब्बत करती हो...
~*~
हर एक दुनिया वाला यह सवाल करता हैं
किसके लिए तू माँग भरती हो
किसके लिए सजती-सवरती हो
लगता हैं मोहब्बत करती हो...
~*~
दुआ किसके लिए मांगती हो
खुदा से किसके लिए लड़ाई करती हो
कौन हैं वोह जो आँखें नर्म कर जाता हैं
लगता हैं मोहब्बत करती हो...
रोमिल, लगता हैं मोहब्बत करती हैं...

#रोमिल

Friday, September 30, 2011

खुदा शायद मुझसे नाराज़ सा है...

उससे बात नहीं होती तो ऐसा महसूस होता है रोमिल 
खुदा शायद मुझसे नाराज़ सा है...

#रोमिल

रोमिल बार-बार यह सोच कर डाकिए से मिलता हूँ
कहीं उसका पैगाम आया तो नहीं है...
यह सोचकर रात में घर के बाहर दिया जला देता हूँ
कहीं वो मेरे घर के बाहर से निकला तो नहीं है...

#रोमिल

Thursday, September 29, 2011

बस जिंदा रहने के पैमाने बदल जाते हैं.

वक़्त के साथ हमराज़ बदल जाते हैं
हर एहसास बदल जाते हैं
किसी के बिछड़ने से कोइए मर नहीं जाता
बस जिंदा रहने के पैमाने बदल जाते हैं.

Wednesday, September 28, 2011

यहाँ जो डूब जाता हैं फिर उभरता नहीं...

क्यों अपनी डूबी हुई ज़िन्दगी का किनारा तलाशते हो रोमिल
यह मोहब्बत-ए-सागर हैं, यहाँ जो डूब जाता हैं फिर उभरता नहीं...

#रोमिल

Tuesday, September 27, 2011

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी तो सारी कटी दुखों में रोमिल,
आखिरी वक़्त क्या ज़िन्दगी-ए-हालात पर रंज करें !

#रोमिल

Monday, September 26, 2011

यही जो लोग रोमिल तुझे अपने ख़ास लगते हैं

यही जो लोग रोमिल तुझे अपने ख़ास लगते हैं
यही तो मुझको बदनाम करते हैं...
***
जो तुम्हारी नज़रों में नेकी-ए-खुदा बनते हैं
यही तो मासूमो को बुरा बनाया करते हैं...
***
शराफत का पहन रखा हैं जिन्होंने चोला
यही तो मुझसे बुरी बात किया करते हैं...
***
इत्तेफाक की बात हैं या उनकी साज़िश
जब भी हम गुनेहगार होते हैं
हाथों के निशान इनके ही मिला करते हैं...

#रोमिल

Saturday, September 24, 2011

गम मेरे आस -पास ही रहता है

ख़ुशी की खबर मुझे चुपके - चुपके सुनाया करो रोमिल,
ग़म मेरे आस -पास ही रहता है,
कहीं भागा न चला आये!

#रोमिल

Friday, September 23, 2011

जुबान से उसको क्या सुनाये हाल-ए-दिल

जुबान से उसको क्या सुनाये हाल-ए-दिल रोमिल
सुना है मोहब्बत वाले नज़रों से हाल-ए-दिल पढ़ लेते है...

#रोमिल अरोरा

Thursday, September 22, 2011

फिर दीवानेपन की हसरत जाग रही हैं

फिर दीवानेपन की हसरत जाग रही हैं
सच पूछो तो मोहब्बत जाग रही हैं...
***
हसीनो का तो काम होता हैं जलाना
सच पूछो तो परवाने की जलने की तमन्ना जाग रही हैं...
***
ऐसा कहाँ कोई मिला जो दर्द न दे
सच पूछो तो दर्द को फिर अपनाने की आरज़ू जाग रही हैं...
***
चाहत तो कहती हैं कि सब कुछ लूटा दूं रोमिल 
बरसों से जो खामोश थी ख़ामोशी जाग रही हैं...

फिर दीवानेपन की हसरत जाग रही हैं
सच पूछो तो मोहब्बत जाग रही हैं...

#रोमिल

Wednesday, September 21, 2011

मेरी ज़िन्दगी को मजबूरियों का घर मत कहो

मेरी ज़िन्दगी को मजबूरियों का घर मत कहो
यह ज़िन्दगी है मेरी, इसे सजा मत कहो.
~
छोड़ जाते है सब मेरा साथ, मेरी मजबूरियों की वजह से
तुमको खुदा की कसम है किसी को भी बेवफा मत कहो.
~
हूँ अपनों की नज़र में निकम्मा-नाकारा
तुम मेरे अपनों को गलत मत कहो.
~
जो हँसना है मुझपर हंस लो
जो कहना है मेरे सामने कह लो
मेरे पीछे मुझे बुरा मत कहो.
मुझ पर हंसा मत करो रोमिल...
मुझ पर हंसा मत करो रोमिल...

#रोमिल

Tuesday, September 20, 2011

मेरे आँसू को थोडा थम जाने दो!

अभी बहुत बरसात हो रही है तुम कहाँ जाओगी,
भीग जाओगी,
मेरे आँसू को थोडा थम जाने दो!

#रोमिल

Monday, September 19, 2011

roz hum khud se takrar karte hai

roz hum khud se takrar karte hai
kyun hum us bewafa se itna pyar karte hai

Itne zakhm diye tune aye khuda
aakar hum tere dar par kyon ibadat baar-baar karte hai

mujhe maloom hai iska anjaam kya hoga
lootne ke liye hum fir mohabbat ka aagaz karte hai

na mujhe dekh apnepan ki nazaron se
jo apne hote hai wahi qatal-e-aam karte hai

aur 

yeh keh kar maine usse tauba kar li romil
kya daulat wale kabhi garibon se pyar karte hai...

#Romil

रोज हम खुद से तकरार करते हैं 
क्यों हम उस बेवफा से इतना प्यार करते हैं... 

इतने जख्म दिए तूने ए खुदा 
आकर हम तेरे दर पर क्यों इबादत बार-बार करते हैं... 

मुझे मालूम है इसका अंजाम क्या होगा 
लूटने के लिए हम फिर मोहब्बत का आगाज़ करते हैं... 

ना मुझे देख अकेलेपन की नजरों से 
जो अपने होते हैं वहीं क़त्ल-ए-आम करते हैं 

और 

यह कहकर मैंने उससे तौबा कर ली रोमिल 
क्या दौलत वाले कभी गरीबों से प्यार करते हैं... 

#रोमिल

kash kuch pal uska mehmaan hota...

kash kuch pal uska mehmaan hota
main bhi apni qismat ka qadardaan hota

woh apna naqab hata kar mujhse milti
main bhi nazaron ka thoda beimaan hota

simta leta usko apni baahon mein
neeche zameen aur upper neela aasmaan hota

reh-reh kar baarish ki boondein gir rahi hoti
khuda bhi apna milan dekh kar khush hota

ajeeb tarah se un khoobsurat palon ka basar hota romil
har saans mein sirf uska naam hota...

kash kuch pal uska mehmaan hota...

#Romil

काश कुछ पल उसका मेहमान होता
मैं भी अपनी किस्मत का कद्रदान होता

वो अपना नक़ाब हटाकर मुझसे मिलती
मैं भी नज़रों का थोडा बेईमान होता

सिमटा लेता उसको अपनी बाहों में
नीचे ज़मीन और ऊपर नीला आसमान होता

रह-रह कर बारिश की बूँदें गिर रही होती
खुदा भी अपना निगहेबान होता

अजीब तरह से उन खूबसूरत पलों का बसर होता रोमिल
हर सांस में सिर्फ उसका ही नाम होता...

काश कुछ पल उसका मेहमान होता...

#रोमिल