Saturday, December 31, 2011

kuch shabd...

उसकी तमन्ना के सिवा ज़िन्दगी में कोई तमन्ना नहीं,
मुझे तो रोमिल, ज़र्रे-ज़र्रे में उसका चेहरा नज़र आता है...
***
लोग कहते है परवरदिगार के घर जाया कर,
मैं कहता हूँ उसने अभी तक मुझे अपना पता बताया नहीं.

लोग कहते है रब के सामने सर झुकाया कर,
मैं कहता हूँ रोमिल, वो कभी सामने आया नहीं.

#रोमिल

Friday, December 30, 2011

यादों में चिराग-ए-दिल जलता रहा सारी रात

यादों में चिराग-ए-दिल जलता रहा सारी रात
हम वजह-ए-तन्हाई किसी को बता न सके...
~*~
फैसला-ए-इश्क हमको मंज़ूर था उनका
हम टूटे हुए खवाब किसी को दिखा न सके...
~*~
दामन-ए-यार की आरज़ू थी अपनी
हम जला हुआ हाथ छुपा न सके...
~*~
आरज़ू थी की उनकी नज़रों के नूर बने
हम अपने आंसू बहने से बचा न सके...
~*~
यादों में चिराग-ए-दिल जलता रहा सारी रात
रोमिल, हम वजह-ए-तन्हाई किसी को बता न सके...

#रोमिल

Thursday, December 29, 2011

न जाने कहाँ है मेरा आशियाना

न जाने कहाँ है मेरा आशियाना,
मेरी दुनिया,
मेरा ठिकाना!
~
न कोई मंजिल, न कोई रास्ता है पता,
जाना मुझे कहाँ न इसका पता,
कोई अपना न कोई पराया,
बस पीछे छोड़ते जाना मुझे कदमों के निशाँ!
न जाने कहाँ है मेरा आशियाना,
मेरी दुनिया,
मेरा ठिकाना!
~
कोई न पुकारे मुझे,
न कोई रोके मुझे,
धीमे-धीमे, हल्के-हल्के,
चलते जाना है मुझे वहाँ,
जहाँ मेरा आशियाना,
मेरी दुनिया,
मेरा ठिकाना!
हो... हो
हो... हो
~
अब मुझे फुरसत कहाँ,
अब मुझे चैन कहाँ,
न कोइए दोस्त,
न कोइए हमदम,
बस
चलते जाना है मुझे वहाँ,
रोमिल, जहाँ मेरा आशियाना,
मेरी दुनिया,
मेरा ठिकाना!
हो... हो
हो... हो

Wednesday, December 28, 2011

बड़े याद आते हैं तेरे जनाज़े के फूल

बड़े याद आते हैं तेरे जनाज़े के फूल
मेरी मजबूरियों के फूल
तेरी बेरुखी के फूल...
*
हर कोई देखता हैं मुझे हैरत से
लगता हैं तुमने आसमान में फैला दिए हैं
हमारी मोहब्बत के फूल...
*
उधर तुम भी बेचैन
इधर हम भी बेचैन
चारों तरफ फ़ैले हैं अपनी बेक़रारी के फूल...
*
सूख गए हैं, कहो किससे कहे
आज भी किताबों में रखे हैं
तूझे देने को फूल...
*
गुज़र गया वो ज़माना रोमिल
जब हम भी दीवाना हुआ करते थे
दिल से लगाये रहते थे तेरे लिखे खतों के फूल...
*
बड़े याद आते हैं तेरे जनाज़े के फूल
मेरी मजबूरियों के फूल
तेरी बेरुखी के फूल...

#रोमिल

Tuesday, December 27, 2011

तुझसे मिलने के करता था मैं बहाने कितने...

तुझसे मिलने के करता था मैं बहाने कितने
याद हैं मुझको वो पल
वो बातें
वो फ़साने कितने...
तुझसे मिलने के करता था मैं बहाने कितने...
***
सड़क पर साथ-साथ चलना तेरा साया बनकर
वो देख के तुझको मेरा नज़रे चुराना
रात में छत पर चुपके से आ जाना दीदार को तेरे
तुझसे मिलने के करता था मैं बहाने कितने...
याद हैं मुझको वो पल
वो बातें
वो फ़साने कितने...
तुझसे मिलने के करता था मैं बहाने कितने...
***
वो सहेलियों संग तेरा मुस्कुराना
देखकर मुझको बातें बनाना
धूप में तेरा जुल्फे सुखाना
मेरी हथेलियों को तेरा छूकर निकल जाना
याद हैं मुझको वोह पल
वो बातें
वो फ़साने कितने...
रोमिल तुझसे मिलने के करता था मैं बहाने कितने...

#रोमिल

Monday, December 26, 2011

तेरे नाम की...

हैं चाँद, सितारों में चमक तेरे नाम की
खुदा ने बनाई हैं ऐसी रोशनी तेरे नाम की...
***
न रूप देखा, न सूरत देखी
मन में बसी हैं तस्वीर तेरे नाम की...
***
तू न जाने तेरे बिना कितना दर्द सहा हैं
हर पटरीले रास्ते पर मेरे साथ हैं हिम्मत तेरे नाम की...
***
ज़िन्दगी भर तेरे नाम की माला जपता रहूँ
इतनी श्रद्धा हैं मुझमें रोमिल तेरे नाम की...

#रोमिल

Sunday, December 25, 2011

तेरी मेहंदी पर...

इस जहाँ को
उस जहाँ को लूटा दूं
तेरी मेहंदी पर...
*
नज़रे तकती रहे
यूँ ही खोया-खोया मैं रहूँ
सब कुछ भूला दूं
तेरी मेहंदी पर...
*
यूँ ही पहलू में लेटा रहूँ
तेरे हाथों की चिलमन से चाँद को देखता रहूँ
चाँद-तारें भी कुर्बान हो जाये
तेरी मेहंदी पर...
*
रब के नूर सी लगती हैं तेरी मेहंदी
एक दुआ सी लगती हैं तेरी मेहंदी
हर पल सजी रहे तेरे हांथों में तेरी मेहंदी
हर चाहत,
हर आरज़ू लूटा दूं
रोमिल, तेरी मेहंदी पर...

#रोमिल

Saturday, December 24, 2011

खुशबू सी महक गई दिल-ए-आशियाने में...

खुशबू सी महक गई दिल-ए-आशियाने में
एक पुराना ख़त पढ़ा अनजाने में...
~*~
जिन ज़ख्मो को वक़्त भर चला था
वो छिड गए अनजाने में...
~*~
आँखों में नमी थी, हंसी थी होंठों पर
कितने ख़्वाब मचल रहे थे अनजाने में...
~*~
ता-उम्र ढूँढ़ते रहे इश्क दुनिया में
वीरानियाँ मिली खतों में हमे अनजाने में...
~*~
खुशबू सी महक गई दिल-ए-आशियाने में
रोमिल, एक पुराना ख़त पढ़ा अनजाने में...

#रोमिल

Friday, December 23, 2011

लोग बदनाम कर देंगे...

तू अमानत हैं किसी और की
मेरा ख्याल ना कर
लोग बदनाम कर देंगे...
~*~
बड़े होते हैं बे-रहम यह दुनिया वाले
तू मेरा नाम ना लिया कर
लोग बदनाम कर देंगे...
~*~
मैंने सजा रखी हैं अपनी रातें तेरी यादों से
तेरे खवाब से मैं अपनी दुनिया रचा लूँगा
मेरे नाम से मेहंदी ना रचाया कर
लोग बदनाम कर देंगे...
~*~
यह मेरे गम मेरे साथ ही दुनिया से चले जायेंगे
आंसू बहते-बहते एक दिन आँखों में सूख जायेंगे
तू मेरी परवाह ना किया कर
रोमिल, लोग बदनाम कर देंगे...

#रोमिल

Thursday, December 22, 2011

आलम

आज भी याद हैं वो खामोश मुलाक़ात का आलम
चहरे पर दिखती मोहब्बत के जज़्बात का आलम!
~
कपकपाते हाथों से देना गुलाब का आलम
होंठों से झलकती मुस्कान का आलम!
~
वो आँखों ही आँखों में इकरार का आलम
बिना मंजिल बातें करते-करते चलते जाना
वो चांदनी रात का आलम !
~
रोमिल आज भी याद हैं वो खामोश मुलाक़ात का आलम...

#रोमिल

Wednesday, December 21, 2011

आँखें

खामोश आँखें कुछ बयान करती है,
कुछ बातें वोह सर-ए-आम करती है.
***
तुम्हारे होंठ भी चुप रहे,
हमारे होंठ भी गुमसुम,
बस आँखों से आँखें गुफ्तगू करती है.
***
सोचता हूँ रोमिल, सलाम कर लूं इन आँखों को,
जो झुका कर दुआ हमारे लिए करती है.
***
तुम आ जाओ बस हमारी बाहों में रोमिल,
यह आँखें तुम्हारा इंतज़ार करती है.

#रोमिल

Tuesday, December 20, 2011

फिर भी अच्छा लगता हैं...

क्या-क्या तुमको हम सुनिए
हर एक टूटा सपना लगता हैं
प्यार में धोखा खाए हैं
फिर भी अच्छा लगता हैं...
~*~
खुद से उसकी बातें करना
पागलपन सा लगता हैं
उसकी यादों में आंसू बहाना
फिर भी अच्छा लगता हैं...
~*~
पानी में उसकी तस्वीर देखना
चाँद सा लगता हैं
उसका नाम रेत पर लिखकर मिटाना
फिर भी अच्छा लगता हैं...
~*~
डूबे हैं उसकी आँखों में रोमिल
फिर न उभरे हैं
सागर में कागज़ की कश्ती चलाना
फिर भी अच्छा लगता हैं...

#रोमिल

Monday, December 19, 2011

इन दिनों...

जाग के कटती हैं रात इन दिनों
तुम्हारी यादों का सहारा हैं इन दिनों...
~*~
चांदनी आती नहीं मेरे अंजुमन में
चारों तरफ फैला अँधियारा हैं इन दिनों...
~*~
मुस्कुराना मैं भूल गया हूँ जैसे
बेरुखी का चेहरा लगाये फिरता हूँ इन दिनों...
~*~
चलो काम आ गई जुदाई तुम्हारी रोमिल
वरना पागल ही समझते लोग मुझे इन दिनों...

#रोमिल

Saturday, December 17, 2011

हम उसी दिन समझ गए थे

हम उसी दिन समझ गए थे
जिस दिन उसने हमसे ऊँची आवाज़ में बात की थी...
मेरी सारी उम्मीद ख़ाक की थी...
जिसके शब्दों में रहती थी हमेशा मिठास
उसके शब्दों में करवाहत थी...
मेरी मोहब्बत-ए-बस्ती बर्बाद थी..
~*~
हम उसी दिन समझ गए थे
जिस दिन उसने किसी गैर से मुलाक़ात की थी...
तेज़ हवाओं में मेरी जज़्बात की धज्जियाँ उजाड़ दी थी...
~*~
रो दिए हम देखकर तेरा भी मिजाज़
तूने भी रब की सुनी
रोमिल के एहसासों की न तुझे कोई फ़िक्र थी...
न रोमिल के खवाबों की कोइए एहमियत थी...


#रोमिल

Friday, December 16, 2011

आशा तो यही है

रोमिल, आशा तो यही है मेरी, कि तुझे हमेशा मुस्कुराते हुए देखूं, मगर डर है की लोग अक्सर मुस्कुराहट में अपनों को भूल जाया करते है। 

आंसू का जब सैलाब आता है तो अपने ही याद आते है, मगर जब ख़ुशी के फूल खिलते है तो ग़ैरों की बाहों में चले जाते है।

#BestAnswers
#रोमिल

Thursday, December 15, 2011

यहाँ सपने तिनके की तरह बिखर जाते है...

यहाँ सपने तिनके की तरह बिखर जाते है,
हर अपने कांच की चूड़ियों की तरह टूट जाते है,
किस-किसको समेटे अपने आँचल में हम,
ज़िन्दगी की आंधियों में आँचल उड़ जाते है…

कितना बदला-बदला इंसान का चेहरा नज़र आता है,
कभी दोस्त तो कभी दुश्मन यह चेहरा नज़र आता है,
मतलब के रिश्तों की डोर सभी ने अपने हाथों में थाम रखी है,
मुख में राम तो बगल में छूरी छुपा रखी है…

सिर्फ परछाईयों में यार नज़र आते है,
ज़िन्दगी की दौड़ में दोस्त पीछे छूटे हुए नज़र आते है,
दो कदम का साथ पाना तो नामुमकिन है,
रोमिल, यहाँ लोग जनाज़े पर भी मतलब निभाने आते है…

यहाँ सपने तिनके की तरह बिखर जाते है...

#रोमिल

Wednesday, December 14, 2011

जब भी यादों के घर से गुज़रता हूँ

जब भी यादों के घर से गुज़रता हूँ
जुबान पर आ जाता हैं नाम तेरा...
***
हर पल तेरी ही उम्मीद में खोया रहता हूँ
किससे पूछू, कौन बताएगा क्या हैं हाल-ए-दिल तेरा...
***
वो ज़माना, वो मोहब्बत बहुत याद आती हैं
मेरी बातों में रात भर जागना तेरा...
***
ज़माने की ख़ाक छानने के बाद मिली थी मंजिल मुझको
मेरे खतों को पढ़कर मुस्कुराना तेरा...
***
अपनी किस्मत पर नाज़ करता था
नसीब को चूम लिया करता था
रोमिल मुझे जब अपना कहना तेरा...
***
जब भी यादों के घर से गुज़रता हूँ
जुबान पर आ जाता हैं नाम तेरा...

#रोमिल

Tuesday, December 13, 2011

वो पल बहुत याद आता हैं...

वो किताबों में
तेरा नाम लिखना
वो दीवारों में
तेरा नाम लिखना
अभी भी याद आता हैं...
***
वो नज़रे मिलाना
नज़रे मिलाकर, नज़रे चुराना
तेरे पहलू में मासूमियत के साथ सो जाना
तेरे झूमके के साथ खेलना
अभी भी याद आता हैं...
***
वो बीता हुआ पल
जिस पल में सिर्फ तुम और हम थे रोमिल
वो पल बहुत याद आता हैं...

#रोमिल

Monday, December 12, 2011

बहुत दिनों के बाद तू मुझको याद आया...

बहुत दिनों के बाद तू मुझको याद आया...
पतझड़ के मौसम में बहारों का दिन आया...
***
फिर निकले आंसू, खुशियों का पैगाम आया
मेरे अँधेरे घर में सूरज का सलाम आया...
***
पूछ रहा हैं हर लम्हा मुझसे हिसाब
सूखे हुए ज़ख्म से क्यों खून आया...
***
चलते रहना तो मुक़द्दर हैं मुसाफिर का
फिर ज़िन्दगी में क्यों ठराव आया...
***
दिल कहता हैं, कह दूं दुनिया-ए-जहां को खुदा हाफिज़ रोमिल
मगर मेरे मित्र का अभी नहीं पैगाम आया...
***
बहुत दिनों के बाद तू मुझको याद आया...
पतझड़ के मौसम में बहारों का दिन आया...

#रोमिल

Sunday, December 11, 2011

किसी से क्या कहे...

दिया हैं दिल अगर किसी बेवफा को
हुआ हूँ जब मैं गरीब, किसी से क्या कहे...
~*~
यह ज़िद थी कि अपनी मोहब्बत में तबाह हो जाऊं
जब हुआ हूँ तबाह, किसी से क्या कहे...
~*~
रहा न याद अब मुझे किसी दोस्त का घर
ठहर जाऊं दो घड़ी किसी दुश्मन के घर, किसी से क्या कहे...
~*~
समझ कर करते थे हम मोहब्बत-ए-इज़हार रोमिल
नासमझी में अब किसी का हाथ थाम ले, किसी से क्या कहे...

Saturday, December 10, 2011

कुछ आदत बदल ली है...

मिलते थे जो महफ़िल में कभी मुस्कुराके
वो अब नज़र फेर लेते है.
कुछ आदत बदल ली है...
~
तहज़ीब से जो बोला करते थे,
वो अब आवाज़ बदल लेते है.
कुछ आदत बदल ली है...
~
रास्ते में मिलते थे, सलाम करते थे,
वो अब दूर से ही रास्ता बदल लेते है.
कुछ आदत बदल ली है...
~
मेरी हालत देखकर
मेरे अपनों ने कुछ आदत बदल ली है...

#रोमिल

Friday, December 9, 2011

तस्वीरें अच्छी नहीं लगती हैं मुझे

तस्वीरें अच्छी नहीं लगती हैं मुझे
दिल में एक चुभन दे जाती हैं मुझे...
***
जब भी देखता हूँ उसको तस्वीर में
यादें दे जाती हैं मुझे...
***
मेरे लिए तो उसका नाम ही काफी हैं
बीते लम्हों की मुलाक़ात-ए-आलम ही काफी हैं
नहीं रखना मुझे वास्ता किसी तस्वीर से
हकीक़त से दूर ले जाती हैं मुझे...
***
कदम-कदम पर रिश्ते बदलते देखे हैं मैंने
सावन के मौसम, पतझड़ में बदलते देखे हैं मैंने
यह वापस उसी भूलभुलैया में ले जाती हैं मुझे...
***
बन गया कातिल मेरे लिए अपनी नज़रों का दांव
एक तरफ तस्वीर-ए-आम
एक तरफ उसका नाम
रह-रह कर उसकी झूठी मुस्कान याद आती हैं मुझे
तस्वीरें अच्छी नहीं लगाती हैं मुझे
दिल में एक चुभन दे जाती हैं मुझे...

#रोमिल

Thursday, December 8, 2011

दिल रो पड़ता है

इश्क में दर्द है इतने मिले की.... दिल रो पड़ता है,
ज़माने ने दिए इतने सितम की सोचकर, दिल रो पड़ता है.

मुस्कुराते रहे सब देखकर हमारा तड़पना,
आज भी जब याद आता है उनका मुस्कुराता चेहरा, दिल रो पड़ता है.

उनकी राहों में हमेशा रहे मर-मिट जाने को हम,
देखकर उनका नज़रे हमसे फेरना, दिल रो पड़ता है.

कभी होते थे हम ही उनकी आइना-ए-नज़र रोमिल,
फूलों से जब कोई आइना तोड़ता है, दिल रो पड़ता है
.

#रोमिल

Wednesday, December 7, 2011

पल-पल उसे याद कर रहा हूँ

पल-पल उसे याद कर रहा हूँ
बस आज कल यही काम कर रहा हूँ...
*
ज़ंजीर बांध रखी हैं खुद मैंने अपने पैरों में
सफ़र-ए-इंतज़ार की थकान दूर करने का इंतज़ाम कर रहा हूँ...
*
उसे मोहब्बत के लिए शायद एक ज़िन्दगी कम थी
इसलिए हर जन्म उसके नाम कर रहा हूँ...
*
जो दीपक जलाकर रखा था उसके आने के इंतज़ार में
उसी दीपक को अपनी आंसू की बूंदों से भुझा रहा हूँ...
*
पल-पल उसे याद कर रहा हूँ
रोमिल बस आज कल यही काम कर रहा हूँ...

#रोमिल

Tuesday, December 6, 2011

आज भी

आज भी खुशबू तेरे ख़त से आती हैं
आज भी ख़त पढ़ लूूं तो आँखों से नींद छीन जाती हैं...
*
आज भी तेरे लिखे शब्दों पर गुमान होता हैं
आज भी हर पल तेरे नाम होता हैं...
*
आज भी शब्द तेरे नगमें बनकर हवा में बिखर जाते हैं
आज भी शब्द तेरे फिजाओं में गाते हैं...
*
आज भी ज़िन्दगी रोशन हो जाती हैं
आज भी खतों में छुपी तेरी मोहब्बत बड़ी याद आती हैं...
रोमिल, आज भी खतों में छुपी तेरी मोहब्बत बड़ी याद आती हैं...

#रोमिल

Monday, December 5, 2011

Heartbreaking Ending In Hindi Movies - Guide (गाइड) 1965

"sawal ab yeh nahi hai ki pani barsega ya nahi
sawal yeh nahi ki mein jiyunga ki marunga
sawal yeh hai
is 
duniya ko banane wala, chalane wala koi hai ya nahi
agar nahi hai to parvah nahi mujhe zindagi mile ya maut aaye
ek andhi duniya mein, andhe ki tarah jeene mein koi parvah nahi
aur agar hai
to dekhana yeh hai ki woh apne majboor bandon ki sunta hai ya nahi"
   
"Raju So Gaye
Soya Tha Par Ab Kuch Kuch Jagane Laga Hoon"

The climax also teaches the Bhagavad Gita's principles: "Man does not die it is only body which dies. Soul remains for ever."

"Raju, Raju...
Jahan Apne Aap Sar Jhuk Jate Hai
Bhagwan Ko Bhi Pathar Ka Roop Maan Liya Jata Hai
Jis Jahan Ko Dekh Kar Parmatama Ki Yaad Aaye
Woh Tirtha Kehlata Hai
Aur Jis Aadmi Ke Darshan Se Parmatama Mein Bhakti Jaage
Woh Mahatama Kehlata Hai"

To agar tere karan purana mandir tirath isthan ban gaya hai
hazaron log, hazaron aankhen upper utha rahi hai prakash ki oor
To fir tujhe chinta kyon?
Sar Jhuka Le
aur 
Shant Ho Kar Beth Ja
Samaj le ki karne wala koi aur hai
tu sirf ek bahana hai
KAAM USKA NAAM TERA
USKA NAAM LE AUR JO SAUPA GAYA HAI US KAAM KO KARTA RAHE
MERI TARAH
EK PATHAR KI TARAH" 

रास्ते में भी साथ छोड़ जाते हैं लोग...

कैसे-कैसे हादसे सह जाते हैं लोग
दिल पर ज़ख्म खाते हैं
फिर भी मुस्कुराते हैं लोग...
***
वक़्त का क्या हैं आकर बीत जाता हैं
यादों में फिर भी दुनिया बसा लेते हैं लोग...
***
जिस चिराग को तूफानों से बचाते हैं
उसी चिराग से अक्सर हाथ जलवा लेते हैं लोग...
***
अपनी दुनिया डूब जाने का डर नहीं हैं
समुन्दर के किनारे रेत के मकान बनाते हैं लोग...
***
मंजिल पर पहुँच कर उसके जाने की उम्मीद नहीं थी मुझको रोमिल
जाने दो...
रास्ते में भी साथ छोड़ जाते हैं लोग...

#रोमिल

Saturday, December 3, 2011

गर तुम मेरे साथ होते

यह बूँदें
यह महकता हुआ मौसम
और भी सुन्दर होते
ग़र तुम मेरे साथ होते
*
होती प्यार की बातें
भीगी गेसू से सजी होती रातें 
ग़र तुम मेरे साथ होते
*
होता उड़ता हवा में आँचल
बादलों संग बहता अपना मन
ग़र तुम मेरे साथ होते
*
और भी हसीन लगता यह दिन
पल-पल मुस्कुराता यह दिन
ग़र तुम मेरे साथ होते...
रोमिल ग़र तुम मेरे साथ होते...

#रोमिल

Friday, December 2, 2011

मोहब्बत हो जाएगी नजदीकियां न बढ़ाया कीजिये..

रोमिल, चिंगारियों को न इस कदर हवा दीजिये 
मोहब्बत हो जाएगी नजदीकियां न बढ़ाया कीजिये..
*
हूँ मैं आग..आग
मुझे सिर्फ हवा का झोंका न समझिये...
*
जल चुकी हैं मुझसे कई हसीनाएं
वक़्त से पहले अपने क़दम थाम लीजिये...
*
खुदा की क़सम
अब यह प्यार न होगा हमसे हुस्न वालों
इतना तो हमारा ऐतबार कीजिये...

#रोमिल

Thursday, December 1, 2011

खुदा का दर छोड़कर तेरे पास आये है...

बहुत मजबूर होकर तेरे पास आये है
खुदा क़सम
खुदा का दर छोड़कर तेरे पास आये है...
*
न ठुकराना हम दर्द-ए-दिल वालों को
अपनों से ठोकर खाकर तेरे पास आये है...
*
न तौफा न दौलत
न तौफा न दौलत
उसकी बेवफाई की कहानी साथ लाये है...
*
तुमसे क्या झूठ बोले
उम्र थोड़ी बची है
तुमसे क्या झूठ बोले
उम्र थोड़ी बची है
अपने कफ़न का सामान साथ लाये है...
*
बहुत मजबूर होकर तेरे पास आये है
खुदा क़सम रोमिल
खुदा का दर छोड़कर तेरे पास आये है...

#रोमिल

Wednesday, November 30, 2011

जैसे फूल, काँटों से लिपटे-लिपटे रहते है...

वोह जिद पर अड़े-अड़े रहते है
जैसे फूल, काँटों से लिपटे-लिपटे रहते है...
*
अनबन में हम-दोनों इस तरह उलझे है
वो दूर भी रहते हैं, करीब भी रहते है...
*
हर एक बात पर जो मेरा ज़िक्र किया करते थे
वो आजकल मेरा नाम लेने से भी परहेज किया करते है...
*
उलझन है बस इस बात की दिल में रोमिल
वो देकर दर्द मुझे
क्यों इतना तन्हाई में रोते है...

#रोमिल

Tuesday, November 29, 2011

सजदा

रोमिल कुछ इस तरह तुमको याद मैं कर लेता हूँ
तेरा नाम लिखकर सजदा मैं कर लेता हूँ...

#रोमिल

Thursday, November 24, 2011

क्या करूं...

यह साल भी बीता बिना बरसात के
मैं आंसू न बहाऊ तो क्या करूं...
*!*
इंतज़ार में कटती नहीं रातें
मैं शमा न जलाऊ तो क्या 
करूं...
*!*
उनसे जब पूछे बेवफाई की वजह हैं क्या
वो तब भी कुछ न बताये तो क्या 
करूं...
*!*
यूंह तो तेरी महफ़िल में मिलते हैं सब गले
कोई दिल से नहीं मिलता तो क्या 
करूं...
*!*
कोई नहीं हैं अपना इस शहर में
तेरा शहर न छोड़ जाऊं तो क्या 
करूं...

#रोमिल

Wednesday, November 23, 2011

इकरार – ए – मोहब्बत

"इकरार – ए – मोहब्बत करके तो देख रोमिल,
ज़िन्दगी का रुख ही बदल जायेगा,
जो तुझे आज लगता है ज़माने से डर,
कल देखना ज़माना खुद तुझसे डर जायेगा”

#रोमिल

Saturday, November 19, 2011

दर्द इतना बढ़ गया है कि अब क्या सुनाये

दर्द इतना बढ़ गया है कि अब क्या सुनाये,
आँखें हो गई है पत्थर, कितना इंतज़ार और हम कर पाए,
मर जाने दो, बस खुली रहेंगे आँखें हमारी,
तुम्हारे इंतज़ार में बोलो इससे ज्यादा और क्या कर जाये!
बोलो! बोलो ! बोलो रोमिल !

Thursday, November 17, 2011

क़ाश

रोमिल, क़ाश रब करे ऐसा हो जाये,
तू मेरी कब्र बन जाये और मैं तुझमे समां जाऊं!

#रोमिल

Tuesday, November 15, 2011

मरने से पहले

अब कुछ भी लिखने को मन नहीं करता,
फिर भी कलम में स्याही डालता रहता हूँ,
शायद मैं मरने से पहले कुछ कहना चाहता हूँ...

सभी खवाब मेरे बिखर चुके है,
फिर भी रोज़ खवाबो की माला मैं बुनता रहता हूँ,
शायद मैं मरने से पहले खवाबो को सच होता देखना चाहता हूँ....

अगर रब मिलेगा कभी,
तो उससे पूछूँगा सवाल बहुत सारे,
पर लोग कहते है मरने से पहले वो किसी से मिलता नहीं है,
फिर भी रोज़ मैं उससे मिलाने की खवाइश दिल में बुनता रहता हूँ,
शायद मैं मरने से पहले रब से कुछ बातें पूछना चाहता हूँ....

मैं मरने से पहले रोमिल दिल को एक बार खुश देखना चाहता हूँ!

#रोमिल

Monday, November 14, 2011

एहसान

"रोमिल, जाते-जाते इस दुनिया से एक एहसान मेरे लिए कर जाना
अपनी कब्र को नाम मेरे कर जाना"

#रोमिल

Sunday, November 13, 2011

मैं हाथ की लकीरों का मोहताज नहीं...

मेरे हौसलों में वो उड़ान हैं मैं अपनी किस्मत बदल लूँगा रोमिल,
मैं हाथ की लकीरों का मोहताज नहीं...

#रोमिल

Saturday, November 12, 2011

फिर फूल झड़ने लगे...

रोमिल, उनकी बातों से फूल झड़ते थे
दिल की आरज़ू हैं कि फिर फूल झड़ने लगे...

#रोमिल

Friday, November 11, 2011

तुम भी वीरान हो गए हो !

रोमिल, अगर मेरा भी दिल-ए-आशियाना उजड़ा है
आँखें यह भी कहती है कि तुम भी वीरान हो गए हो !

#रोमिल

Thursday, November 10, 2011

बिखर कर दूसरे की ज़िन्दगी में खुशबू लाते है...

"रोमिल, कांटे हमेशा डाली के साथ लिपटे रहते है...
मगर फूल हमेशा बिखर जाते है और बिखर कर दूसरे की ज़िन्दगी में खुशबू लाते है..."

#रोमिल

Wednesday, November 9, 2011

मैं खुश हूँ उसे खुश देखकर...

रोमिल, अपने दिल-ए-अरमान को सर-ए-दुनिया में बेचकर
मैं खुश हूँ उसे खुश देखकर...

#रोमिल

Tuesday, November 8, 2011

सुकून

ग़र मंदिर में सुकून मिलता
ग़र मस्जिद में सुकून मिलता
तो रोमिल, इंसान घर क्यों जाता?

#रोमिल

Monday, November 7, 2011

आदत

उसे जो झूठ बोलने की आदत पड़ गई हैं रोमिल,
कसूर मेरा था जो उसकी हर बात पर ऐतबार कर लेता था.

#रोमिल

Sunday, November 6, 2011

सच्चाई का मैं आइना था...

पत्थर का छोटा सा टुकड़ा भी मुझे तोड़ जाता था रोमिल
सच्चाई का मैं आइना था...

#रोमिल

Saturday, November 5, 2011

शुक्र

शुक्र खुदा का इतना हैं वो आये नज़र तो सही
रोमिल, मेरे साथ नहीं, किसी और के साथ ही सही!

#रोमिल

Wednesday, November 2, 2011

जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं

जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं
अपना दीवानापन याद आता हैं
उनका हुस्न याद आता हैं.
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
***
जलती हुई आग के सामने
जलते हुए दो बदन याद आते हैं...
कभी उनका नज़रें झुकाना याद हैं
कभी नज़रों से तीर चलाना याद आता हैं.
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं...
***
कहने को तो बहुत बातें थी
मगर लाबून का थर-थराना याद आता हैं
कभी उनका कुछ कहते-कहते रुक जाना याद आता हैं
कभी हमारा मिश्री की तरह बातें बोलना याद आता हैं...
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं...
***
हर लम्हा बहुत तड़फाता हैं
पल-पल याद दिलाता हैं
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
चहरे से जुल्फों को हटाना याद आता हैं
शर्म से पैरों को दामन में छुपाना याद आता हैं
मखमली हाथों में चूड़ियों का खन-खनाना याद आता हैं
वो उँगलियों से ज़मीन पर हरकतें करना याद आता हैं...
जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं
हमको उनका ख़याल आता हैं
अपना दीवानापन याद आता हैं
उनका हुस्न याद आता हैं.
रोमिल, जब-जब सर्दियों का मौसम आता हैं...

#रोमिल

Tuesday, November 1, 2011

एक टूटा हुआ पत्ता उड़कर मेरे पास आया

एक टूटा हुआ पत्ता उड़कर मेरे पास आया
मुझसे पूछा
किसकी खता से मेरा यह हाल हुआ हैं
हवा का कसूर हैं या
खिज़ा का...

अभी तो डाल पर ठीक से नहीं झूल सका
अभी तो कई पंछियों की आवाज़े मुझे सुननी बाकी थी
अभी तो मैंने नहीं देखे कई बसंत
किसकी खता से मेरा यह हाल हुआ हैं
हवा का कसूर हैं या
खिज़ा का...

मैं बोला 
नहीं पता मुझे किसका कसूर हैं
हवा का, खिज़ा का या
खुदा का
बस इतना जानता हूँ कि
कसूर किसी का तो हैं...

#रोमिल

Monday, October 31, 2011

कितने

कितने हादसों की नुमाइश नहीं होती अखबारों में रोमिल,
कितने दिल टूट जाते है, बिना आंसू बहाए...

#रोमिल